BRICS Summit 2026 के दौरान नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई विश्व नेताओं का स्वागत किया। इस दौरान वैश्विक कूटनीति के साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी चर्चा में रही।
भारत मंडपम में लगाए गए एक खास बैकड्रॉप ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा। इसमें तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर के भव्य गलियारे की तस्वीर दिखाई गई। मंदिर की विशाल स्तंभयुक्त वास्तुकला दक्षिण भारत की प्राचीन स्थापत्य परंपरा और आध्यात्मिक विरासत की पहचान मानी जाती है।
खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य नेताओं को रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर और उसके महत्व के बारे में जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय मंच पर तमिलनाडु की इस ऐतिहासिक धरोहर की मौजूदगी ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक अलग पहचान दी।
रामेश्वरम में दिखी खास प्रतिक्रिया
रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर BRICS जैसे बड़े वैश्विक आयोजन में प्रदर्शित किए जाने को लेकर रामेश्वरम में भी उत्साह देखा गया। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक मंदिर की तस्वीर नहीं, बल्कि उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने रखने का अवसर है।
तमिलनाडु के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का भी मानना है कि भारत की सभ्यता को समझने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों की विरासत को वैश्विक मंच पर सामने लाना जरूरी है। रामेश्वरम की परंपरा, मंदिर की वास्तुकला और उसकी आध्यात्मिक महत्ता भारत की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
BRICS मंच पर Tamil Culture की झलक क्यों खास?
BRICS का मंच मुख्य रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था, कूटनीति और रणनीतिक सहयोग से जुड़ा है। ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के बीच भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता मिलना भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को भी दर्शाता है।
रामनाथस्वामी मंदिर के गलियारे की तस्वीर के जरिए दक्षिण भारत की वास्तुकला और तमिल सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के शीर्ष नेताओं के सामने प्रस्तुत किया गया। यह संदेश भी गया कि भारत की पहचान केवल उसकी आधुनिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसकी प्राचीन सभ्यता और क्षेत्रीय विविधता से भी बनती है।
BRICS Summit 2026 में रामेश्वरम की यह झलक इसलिए खास बन गई क्योंकि एक ओर जहां भारत दुनिया के सामने आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका रख रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अपनी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।