ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय, खूंटी, झारखंड: भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी डिफेंडर निक्की प्रधान ने एशियन गेम्स में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद अपने सफर और संघर्ष को साझा किया। भारतीय टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद एशियन गेम्स में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक हासिल किया। इस जीत के साथ भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधा टिकट भी पक्का कर लिया।
खूंटी की रहने वाली निक्की प्रधान के लिए यह उपलब्धि खास है। उनका हॉकी सफर बेहद सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ था। उनके पिता ने बचपन में बांस के डंडे से हॉकी स्टिक बनाकर दी थी। वहीं, उनकी मां चाहती थीं कि निक्की पढ़ाई और घर के काम पर ध्यान दें, लेकिन हॉकी के प्रति उनका जुनून उन्हें मैदान तक खींच ले जाता था।
निक्की के खेल को उनके शुरुआती कोच दशरथ ने पहचाना और परिवार से बातचीत कर उन्हें हॉकी डे-बोर्डिंग में दाखिला दिलाया। इसके बाद प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के जरिए उनका खेल लगातार निखरता गया। धीरे-धीरे उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और भारतीय महिला हॉकी टीम तक पहुंचीं।
निक्की प्रधान ने 2016 रियो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया और झारखंड से ओलंपिक में खेलने वाली पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं। इसके बाद टोक्यो ओलंपिक 2020 में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा रहीं, जहां टीम ने ऐतिहासिक रूप से चौथा स्थान हासिल किया।
उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में एशियन गेम्स के अलावा एशिया कप, एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच नेशंस कप जैसी प्रतियोगिताओं में भी पदक शामिल हैं। हॉकी इंडिया के रिकॉर्ड के अनुसार, निक्की ने 2016 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था और भारतीय टीम की अनुभवी डिफेंडरों में अपनी जगह बनाई।
एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद निक्की प्रधान ने इसे किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरी टीम की मेहनत और एकजुटता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक-दूसरे का साथ दिया और फाइनल में भी उसी विश्वास के साथ मैदान पर उतरी।
चीन के खिलाफ फाइनल में भारत ने 1-0 से जीत दर्ज की। इस जीत ने भारतीय महिला हॉकी के लिए एक लंबे इंतजार को खत्म किया। निक्की प्रधान सहित झारखंड की चार खिलाड़ियों—सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग, दीपिका सोरेंग और निक्की प्रधान—ने इस ऐतिहासिक अभियान में हिस्सा लिया।
एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम की नजर अब 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है। एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने के कारण भारत ने ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है। ऐसे में टीम के पास अब अगले बड़े मंच के लिए तैयारी करने का समय है।
निक्की प्रधान के लिए यह सफर केवल एक और पदक जीतने की कहानी नहीं है। बांस की स्टिक से शुरू हुआ उनका सफर रियो और टोक्यो ओलंपिक तक पहुंचा और अब एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के बाद उनकी नजर एक और बड़े लक्ष्य पर है। भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ निक्की भी 2028 के ओलंपिक मंच पर देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी में जुटेंगी।