Home ফ্যাক্ট ফাইল পঞ্চায়েতের পাঁচ কাহন পৌর বার্তা জেলার চালচিত্র চাষী ভাই বলছি শরীর স্বাস্থ্য জেলার সেনাপতি মাঠে ময়দানে বিনোদন সম্পাদকীয় কলম
BREAKING NEWS
সমুদ্রে গিয়েও মিলছে না ইলিশ! জলবায়ুর পরিবর্তনে কি বদলে যাচ্ছে মাছের গতিপথ?   •   আজকের আবহাওয়া: বৃষ্টির সম্ভাবনা দক্ষিণবঙ্গের একাধিক জেলায়, ভাসবে কি বাংলা? নজর আবহাওয়ার গতিপ্রকৃতিতে   •   দুর্যোগের আগে প্রশাসনিক তৎপরতা, কিন্তু স্থায়ী সুরক্ষা কোথায়? উপকূলবাসীর প্রশ্ন থেকেই যায়   •   গঙ্গার ভাঙন রোধ, ঘাটাল মাস্টার প্ল্যান ও সুন্দরবনের নদীবাঁধ সংস্কারে তৎপরতা, কেন্দ্রীয় জলশক্তিমন্ত্রীর সঙ্গে বিশেষ বৈঠকে মুখ্যমন্ত্রী   •   অর্থসংকটের অন্ধকার পেরিয়ে আলোর উৎসব, শ্যাওড়দা গ্রামে ৪৯ বছরের লক্ষ্মীপুজো আজ সম্প্রীতি ও মিলনের প্রতীক   •   আসানসোলে বিনিয়োগের নামে কোটি কোটি টাকার প্রতারণার অভিযোগ! বিপাকে ১০-১২ হাজার মানুষ, বন্ধ অফিস, উধাও কর্তারা

बकरी पालन योजना से गुजरात के किसानों को मिल रहा आत्मनिर्भरता का आधार

12 Sep 2026
06:29 AM

 

ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय ,गुजरात : गुजरात में सरकार की पशुपालन योजनाएं ग्रामीण किसानों और परिवारों के लिए आय का स्थायी स्रोत तैयार करने में मददगार साबित हो रही हैं। जामनगर जिले के तमाचल गांव के हाथाभाई चावड़िया ने रोजगार और आर्थिक परेशानियों के बीच बकरी पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया। सरकारी सहायता मिलने के बाद उन्होंने 10 बकरियां और एक बकरा खरीदा और पशुपालन का व्यवसाय शुरू किया।

बकरी पालन शुरू करने के बाद हाथाभाई को नियमित आमदनी का साधन मिला। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

पशुपालन विभाग की बकरी पालन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को बकरियां खरीदने के लिए 1.20 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा बकरियों के लिए बाड़ लगाने, रहने की जगह तैयार करने और चारे की व्यवस्था जैसी जरूरतों में भी सहायता का प्रावधान है।

सरकार की ओर से केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और देखभाल के लिए पशु चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पशुपालकों को अपने पशुधन की देखभाल में मदद मिल रही है और पशुपालन को अधिक टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन कम लागत में आय का अतिरिक्त या मुख्य स्रोत बनने की क्षमता रखता है। ऐसे में सरकारी सहायता से किसानों और ग्रामीण परिवारों को पशुपालन अपनाने, अपनी आमदनी बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

गुजरात की यह पहल ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन जैसे वैकल्पिक आय स्रोतों से जोड़ने की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाती है।