ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,नई दिल्ली: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। इसी बीच भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर अपनी बात रखी।
प्रवेश वर्मा ने कहा कि SIR कोई असामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाता सूची को अपडेट और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके अनुसार, जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी तरह की जानकारी की कमी, दस्तावेजों में अंतर या अन्य विसंगति पाई गई है, उन्हें नोटिस भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस मिलने का मतलब सीधे तौर पर मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है। संबंधित मतदाता जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराकर अपने रिकॉर्ड का सत्यापन करा सकते हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान जारी नोटिस दस्तावेजों और रिकॉर्ड में मौजूद कमियों की जांच के लिए हैं और नोटिस अपने आप में नाम हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है।
रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.6 लाख नाम शामिल नहीं किए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में मतदाताओं को रिकॉर्ड में विसंगतियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। प्रभावित मतदाताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।
इस बीच SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका पर सुनवाई हो रही है, जिसमें नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और नोटिस के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के दौरान अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है। इसलिए मौजूदा ड्राफ्ट सूची में हुए बदलावों को अंतिम मतदाता सूची के रूप में नहीं देखा जा रहा है।