ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की अपील की है। राहुल गांधी ने आग्रह किया है कि उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पदभार ग्रहण नहीं करने दिया जाए। इस मुद्दे को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
यह पूरा मामला उत्तराखंड की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हुई हत्या से जुड़ा है। अंकिता ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका और उसकी पहचान को लेकर अंकिता का परिवार लगातार सवाल उठा रहा है। परिवार की मांग है कि इस पहलू की भी निष्पक्ष और पूरी जांच होनी चाहिए। इसी संदर्भ में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है।
15 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी से जुड़े सवाल अब भी अनसुलझे हैं। उन्होंने जांच की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने समय बाद भी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वह सरकार को दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की सलाह दें और सीबीआई जांच पूरी होने तक उन्हें पदभार ग्रहण करने से रोकने पर विचार करें।
उन्होंने इस मामले में अंकिता के माता-पिता को न्याय मिलने की उम्मीद का हवाला देते हुए कहा कि उनकी आवाज और मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के बाद अंकिता भंडारी के माता-पिता ने भी विरोध जताया है। परिवार ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
परिवार की ओर से दुष्यंत गौतम के कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस मामले में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। आरोपों की सत्यता और कथित वीआईपी की भूमिका की जांच संबंधित जांच एजेंसी के दायरे में है।
अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर न्याय की मांग उठाई। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने परिवार से मुलाकात कर उनके प्रति समर्थन जताया।
15 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। बाद में हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी आपत्ति जताई।
परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जा सकता है।
राहुल गांधी की अपील के बाद अब इस बात पर ध्यान केंद्रित हो गया है कि राष्ट्रपति और केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी से जुड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है और जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनके कथित संबंधों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
फिलहाल, अंकिता भंडारी के परिवार की न्याय की मांग और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर उठा विवाद राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।