ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में ‘नेशनल स्ट्रैटेजिक ट्रेड कमांड सेंटर’ (NSTCC) का शुभारंभ किया। इस केंद्र का उद्देश्य भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निगरानी को मजबूत करना, व्यापार संबंधी आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण करना और साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग द्वारा विकसित यह केंद्र विभिन्न डिजिटल प्रणालियों से व्यापार संबंधी आंकड़ों को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराएगा। इससे सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं को देश के व्यापार प्रदर्शन, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं, नियामक मंजूरियों, आवेदनों के निपटारे और अन्य महत्वपूर्ण परिचालन गतिविधियों की समग्र जानकारी मिल सकेगी।
नेशनल स्ट्रैटेजिक ट्रेड कमांड सेंटर में आधुनिक डेटा एनालिटिक्स और विजुअलाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके माध्यम से व्यापार से जुड़े आंकड़ों को उपयोगी जानकारी में बदलने के साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन का आकलन किया जा सकेगा।
इस प्लेटफॉर्म पर इंटरैक्टिव डैशबोर्ड उपलब्ध होंगे, जिनमें प्रमुख व्यापार संकेतक, योजनाओं का प्रदर्शन, लंबित आवेदन, प्रक्रिया पूरी करने में लगने वाला समय, क्षेत्रीय रुझान और अनुपालन से संबंधित जानकारी शामिल होगी। अधिकृत अधिकारी निर्धारित अनुमति के अनुसार राष्ट्रीय स्तर, क्षेत्रीय प्राधिकरण, विभिन्न योजनाओं, उत्पादों, निर्यात गंतव्यों और व्यक्तिगत आवेदनों के आधार पर आंकड़ों का विश्लेषण कर सकेंगे।
कमांड सेंटर के शुरुआती चरण में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की कई प्रमुख प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। इनमें आयातक-निर्यातक कोड (IEC), एडवांस ऑथराइजेशन, एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) योजना, सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (CoO), स्कोमेट (SCOMET) और प्रतिबंधित आयात-निर्यात से संबंधित प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इन डैशबोर्ड के जरिए योजनाओं के उपयोग, निर्यात संबंधी दायित्वों, आवेदन निपटारे की गति और क्षेत्रीय कार्यालयों के कामकाज की निगरानी करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही प्रशासनिक देरी और प्रक्रियागत बाधाओं की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
केंद्र के शुभारंभ के दौरान पीयूष गोयल ने डेटा आधारित और साक्ष्य-आधारित व्यापारिक निर्णय लेने में इस पहल की भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से SCOMET डैशबोर्ड की समीक्षा की और लंबित आवेदनों के निपटारे में तेजी लाने पर जोर दिया।
उन्होंने अंतर-मंत्रालयी समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया। जरूरत पड़ने पर साप्ताहिक बैठकें आयोजित कर लंबित आवेदनों को जल्द निपटाने की दिशा में काम करने की बात भी कही।
NSTCC का एक प्रमुख उद्देश्य उत्पाद और बाजार के आधार पर व्यापार का विश्लेषण करना है। इससे संभावित निर्यात बाजारों की पहचान, व्यापार समझौतों के उपयोग का आकलन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की स्थिति की निगरानी करने में सहायता मिलेगी।
यह पहल भारत की व्यापार संबंधी विश्लेषण क्षमता को मजबूत करने के साथ निर्यात के नए अवसरों की पहचान करने में भी सहायक हो सकती है। इसके जरिए उभरते व्यापारिक रुझानों और उन क्षेत्रों का पता लगाने में मदद मिलेगी, जहां नीतिगत बदलाव या प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत है।
इस केंद्र को DGFT की मौजूदा डिजिटल प्रणालियों और ‘ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म’ सहित उपलब्ध डिजिटल बुनियादी ढांचे के साथ जोड़कर विकसित किया गया है। भविष्य में अन्य सरकारी विभागों और व्यापार से संबंधित एजेंसियों के आंकड़ों को भी चरणबद्ध तरीके से इसमें शामिल करने की योजना है।
आगे चलकर संबंधित मंत्रालयों, राज्यों, निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य अधिकृत संस्थानों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। अतिरिक्त डेटा, स्वचालित अलर्ट और उन्नत विश्लेषण तकनीकों के माध्यम से इसकी क्षमताओं को बढ़ाने की योजना है।
कुल मिलाकर, नेशनल स्ट्रैटेजिक ट्रेड कमांड सेंटर की शुरुआत भारत में व्यापार प्रशासन को अधिक डेटा-आधारित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके जरिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े रुझानों पर लगातार नजर रखने, प्रशासनिक चुनौतियों की पहचान करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बेहतर नीतिगत निर्णय लेने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
स्रोत: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार।