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गढ़चिरौली में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, जंगल से हथियार और विस्फोटक बरामद; मौके पर किया गया नष्ट

07 Oct 2026
08:38 PM

ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय : महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी कार्रवाई करते हुए जंगल क्षेत्र से भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की है। पुलिस के मुताबिक, यह सामग्री कथित तौर पर नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से छिपाकर रखी थी। बरामद किए गए विस्फोटक और खतरनाक सामग्री को सुरक्षा मानकों के तहत घटनास्थल पर ही नष्ट कर दिया गया।

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 6 अक्टूबर 2026 को भामरागढ़ उपखंड के कोपरशी जंगल क्षेत्र में खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू की गई थी। सूचना मिली थी कि घने जंगल में नक्सलियों ने हथियारों और विस्फोटक सामग्री का एक बड़ा भंडार छिपाकर रखा है। इसके बाद स्पेशल ऑपरेशंस स्क्वॉड और बॉम्ब डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) की टीमों को इलाके में तलाशी अभियान के लिए भेजा गया।

तलाशी अभियान में हथियारों का जखीरा बरामद

सुरक्षा बलों ने जंगल के संदिग्ध हिस्सों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान तीन रॉकेट लॉन्चर, दो सिंगल-शॉट राइफल, दो 12-बोर राइफल, 12-बोर के तीन जिंदा कारतूस और 10 डेटोनेटर बरामद किए गए। इसके अलावा करीब 150 मीटर केबल वायर, नौ मैगजीन, 10 कुकर, पांच वॉकी-टॉकी और 12 वॉकी-टॉकी चार्जर भी मिले।

कुछ अन्य रिपोर्टों में बरामद सामग्री की सूची में अलग-अलग हथियार और विस्फोटक सामग्री का उल्लेख किया गया है। इसलिए बरामदगी की अंतिम विस्तृत सूची पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

विस्फोटक सामग्री को मौके पर किया गया नष्ट

पुलिस ने बताया कि बरामद विस्फोटक और अन्य खतरनाक सामग्री को सुरक्षित तरीके से घटनास्थल पर ही नष्ट किया गया। इस कार्रवाई में BDDS की टीम ने सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया। गढ़चिरौली पुलिस के BDDS का काम ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संदिग्ध IED, लैंडमाइन और अन्य विस्फोटक सामग्री की पहचान तथा उन्हें निष्क्रिय करना है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए जंगलों में इस तरह छिपाकर रखे गए हथियार और विस्फोटक एक गंभीर खतरा माने जाते हैं। विशेष रूप से दुर्गम और घने वन क्षेत्रों में तलाशी अभियान के दौरान जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।

खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई

अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों को मिली खुफिया जानकारी के बाद अभियान की योजना बनाई गई। इसके बाद विशेष टीमों ने संदिग्ध क्षेत्र को चिन्हित कर व्यवस्थित तरीके से तलाशी शुरू की। अभियान का उद्देश्य छिपे हुए हथियारों और विस्फोटक सामग्री का पता लगाना तथा उन्हें सुरक्षा बलों या आम नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल होने से रोकना था।

गढ़चिरौली जिला लंबे समय से नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है। जिले के दक्षिणी हिस्से में घने जंगल और दुर्गम इलाकों के कारण सुरक्षा बलों के लिए अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार, गढ़चिरौली में आठ पुलिस उपमंडल और 14 पुलिस थाने हैं, जबकि कई इलाके घने जंगलों से घिरे हुए हैं।

महाराष्ट्र में नक्सल विरोधी अभियान जारी

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब महाराष्ट्र पुलिस ने 2026 में गढ़चिरौली क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों को तेज किया है। महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार, मई 2026 में गढ़चिरौली को सक्रिय सशस्त्र माओवादी कैडरों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां जंगल क्षेत्रों में छिपे हथियारों और अन्य लॉजिस्टिक नेटवर्क की तलाश जारी रखे हुए हैं।

पुलिस और सुरक्षा बलों का मानना है कि पुराने या छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों को बरामद करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका इस्तेमाल भविष्य में हिंसक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। ऐसे अभियानों के जरिए सुरक्षा एजेंसियां जंगलों में मौजूद संभावित हथियार भंडार और अन्य संसाधनों को निष्क्रिय करने की कोशिश कर रही हैं।

गढ़चिरौली में हुई इस कार्रवाई में किसी बड़ी हिंसक मुठभेड़ की जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल पुलिस बरामद सामग्री की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हथियार और विस्फोटक किस नेटवर्क से जुड़े थे तथा इन्हें जंगल में कब और किस उद्देश्य से छिपाया गया था।

सुरक्षा बलों की ओर से जंगल में तलाशी अभियान और निगरानी जारी रहने की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि छिपे हुए हथियारों और विस्फोटक सामग्री को बरामद कर संभावित खतरे को समय रहते समाप्त किया जा सके।