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सत्य निकेतन के बाद दिल्ली के सीमापुरी में फिर गिरी रिहाइशी इमारत, मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी

07 Oct 2026
08:05 PM

ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय : नई दिल्ली में एक बार फिर रिहाइशी इमारत गिरने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और पुराने तथा निर्माणाधीन भवनों की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में ईदगाह मछली मंडी के पास एक बहुमंजिला रिहाइशी इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। शुरुआती जानकारी में कुछ लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी।

बताया गया कि हादसा दोपहर करीब 3:15 से 3:30 बजे के बीच हुआ। सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, नगर निगम, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और एनडीआरएफ की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं। मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जबकि स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती दौर में अपने स्तर पर राहत कार्य में मदद की।

हादसे में तीन लोगों की मौत, कई घायल

बाद की जानकारी के अनुसार हादसे में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। कई लोग घायल हुए हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बचाए गए लोगों में आठ घायल शामिल थे, जिन्हें राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया। घायलों में एक करीब तीन साल का बच्चा भी बताया गया है।

मृतकों में 12 वर्षीय एक लड़की और करीब 21 वर्षीय गुलफिशा शामिल थीं। रिपोर्टों के अनुसार गुलफिशा लगभग चार महीने की गर्भवती थीं। हादसे के बाद उनके परिजन लगातार मलबे के पास मौजूद रहे और बचाव दल से अपने परिवार के सदस्यों को जल्द बाहर निकालने की अपील करते रहे।

आसपास की इमारतें भी प्रभावित

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत गिरने से आसपास की दो-तीन इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। घटनास्थल पर मलबा फैल गया और संकरी गलियों के कारण राहत एवं बचाव दल को काम करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने प्रभावित हिस्से का निरीक्षण करते हुए यह पता लगाने की कोशिश की कि कहीं आसपास की इमारतें भी असुरक्षित तो नहीं हो गई हैं।

हादसे के बाद घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। कई स्थानीय लोग मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते नजर आए। राहतकर्मियों ने मलबे के अलग-अलग हिस्सों में खोज अभियान चलाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न रह गया हो।

एक महीने के भीतर दूसरा बड़ा हादसा

सीमापुरी की यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इससे लगभग एक महीने पहले ही दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। 6 सितंबर 2026 को हुए उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। उस इमारत में पीजी के तौर पर छात्र रह रहे थे।

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने शहर के विभिन्न इलाकों में असुरक्षित और कथित तौर पर अवैध निर्माण वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज की थी। रिपोर्टों के अनुसार, एमसीडी ने अलग-अलग जोन में कई इमारतों को गिराया, कुछ संपत्तियों को सील किया और कई अन्य के खिलाफ नोटिस जारी किए थे।

सत्य निकेतन हादसे की जांच में क्या सामने आया था?

सत्य निकेतन में हुए हादसे की जांच के दौरान पुलिस ने इमारत में हादसे से कुछ दिन पहले हुए निर्माण और बदलावों की जानकारी जुटाई थी। पुलिस के अनुसार, बेसमेंट को समतल करने के लिए उसमें बड़ी मात्रा में निर्माण मलबा डाला गया था। इसके बाद ग्राउंड फ्लोर की एक दीवार हटाकर अतिरिक्त जगह बनाने का काम भी किया गया था। जांच में इन संरचनात्मक बदलावों को इमारत की स्थिरता से जोड़कर देखा गया था।

उस हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की कुछ इमारतों को भी असुरक्षित घोषित किया और एक समीपवर्ती इमारत को नियंत्रित तरीके से गिराने की कार्रवाई की थी। इससे दिल्ली में पुराने भवनों, अनधिकृत निर्माण और संरचनात्मक सुरक्षा की निगरानी को लेकर सवाल उठे थे।

सीमापुरी हादसे की वजह अभी स्पष्ट नहीं

न्यू सीमापुरी में इमारत गिरने की वास्तविक वजह फिलहाल जांच का विषय है। कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हादसे से पहले आसपास निर्माण या तोड़फोड़ का काम चल रहा था। एक स्थानीय परिवार के सदस्य ने आरोप लगाया कि पड़ोसी इमारत में कई दिनों से मशीन के जरिए तोड़फोड़ की जा रही थी और इसका असर उनके मकान पर पड़ा। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और अधिकारियों की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।

कुछ शुरुआती स्थानीय दावों में हाल में महसूस किए गए भूकंपीय झटकों का भी जिक्र किया गया, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक इमारत गिरने का कारण भूकंप को नहीं बताया है। इसलिए फिलहाल किसी एक वजह को हादसे का कारण मानना जल्दबाजी होगी।

दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

लगातार दो बड़े भवन हादसों ने दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे इलाकों में जहां छोटे भूखंडों पर बहुमंजिला निर्माण, पुरानी इमारतों में बदलाव और आसपास लगातार निर्माण गतिविधियां होती रहती हैं, वहां नियमित संरचनात्मक जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

सीमापुरी हादसे के बाद प्रशासन के सामने सबसे तत्काल चुनौती मलबे में किसी और व्यक्ति के फंसे होने की संभावना की जांच और आसपास की इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। साथ ही, हादसे की विस्तृत जांच के बाद यह स्पष्ट होना बाकी है कि भवन की स्थिति कैसी थी, उसमें हाल में कोई निर्माण या बदलाव हुआ था या नहीं और क्या किसी नियम का उल्लंघन किया गया था।

सत्य निकेतन की घटना के लगभग एक महीने बाद सीमापुरी में हुई यह दुर्घटना दिल्ली में भवन सुरक्षा और निर्माण नियमों के प्रभावी पालन को लेकर चिंता को फिर सामने ले आई है। अब जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि सीमापुरी की इमारत आखिर किन परिस्थितियों में ढही और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।