ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय : झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 की शाम रांची के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने रात करीब 8:30 बजे अंतिम सांस ली। रूपी सोरेन लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और 18 सितंबर को सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें रांची के हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।
रूपी सोरेन के निधन की खबर सामने आते ही सोरेन परिवार, JMM कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां की तबीयत को लेकर लगातार अस्पताल के डॉक्टरों के संपर्क में थे। बुधवार को उनकी हालत और बिगड़ने की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री अस्पताल पहुंचे थे। परिवार के अन्य सदस्य और झारखंड सरकार के कई मंत्री एवं नेता भी अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों से उनकी स्थिति की जानकारी ली।
मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने अपनी मां को अपने जीवन की सबसे बड़ी छांव बताते हुए पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता रहे शिबू सोरेन को भी याद किया। हेमंत सोरेन ने लिखा कि पिता के जाने के बाद मां ही उनकी सबसे बड़ी छांव थीं और अब वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गई।
हेमंत सोरेन के पिता और JMM के संस्थापक नेताओं में शामिल शिबू सोरेन का अगस्त 2025 में निधन हुआ था। पति के निधन के बाद रूपी सोरेन परिवार के साथ रहीं और सोरेन परिवार की वरिष्ठ सदस्य के तौर पर उनकी भूमिका बनी रही।
रूपी सोरेन के निधन पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी शोक व्यक्त किया। पार्टी ने उन्हें संघर्ष, त्याग और धैर्य की प्रतीक बताते हुए श्रद्धांजलि दी। JMM की ओर से कहा गया कि शिबू सोरेन के लंबे संघर्ष और झारखंड आंदोलन के दौरान रूपी सोरेन परिवार के लिए मजबूत आधार बनी रहीं। पार्टी ने उनके निधन को झारखंड और देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया तथा शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
रिपोर्टों के अनुसार, रूपी सोरेन को सितंबर में सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति में उतार-चढ़ाव बना रहा। बुधवार को उनकी हालत अचानक गंभीर हो गई। चिकित्सकों की टीम ने उनकी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार निगरानी रखी और आवश्यक चिकित्सा सहायता दी। इसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
कुछ रिपोर्टों में उनकी उम्र 75 वर्ष, जबकि कुछ में 78 या 80 वर्ष बताई गई है। इसलिए उनकी सटीक आयु को लेकर विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में अंतर है।
रूपी सोरेन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और JMM के प्रमुख संस्थापक नेताओं में शामिल रहे शिबू सोरेन की पत्नी थीं। शिबू सोरेन के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लंबे संघर्ष के दौरान रूपी सोरेन ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें सोरेन परिवार को संभालने वाली महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में याद किया गया है।
रूपी सोरेन का राजनीति से भी जुड़ाव रहा था। वर्ष 1999 में उन्होंने दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी से हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, यह मुकाबला काफी करीबी रहा था।
रूपी सोरेन के निधन की खबर के बाद झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े नेताओं ने शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया। अलग-अलग दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई तथा दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि दी।
रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार ने एक वर्ष के भीतर माता और पिता दोनों को खो दिया है। शिबू सोरेन के निधन के करीब एक साल बाद रूपी सोरेन का जाना परिवार के लिए गहरा व्यक्तिगत आघात माना जा रहा है। झारखंड की राजनीति में सोरेन परिवार की लंबी भूमिका को देखते हुए उनके निधन की खबर का राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी व्यापक असर दिखाई दे रहा है।
रांची में मुख्यमंत्री आवास और सोरेन परिवार के बीच फिलहाल শোক का माहौल है। रूपी सोरेन के निधन से परिवार, JMM कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों में गहरा दुख है।