जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद्य ने इसे सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण कामयाबी बताया है। वैद्य के मुताबिक, मूसा को अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से जोड़कर देखा जाता रहा है और उसका नाम पीर पंजाल क्षेत्र में हुई कई आतंकी घटनाओं की जांच में भी सामने आया था।
मंगलवार को यूसमर्ग के कोराग इलाके में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त अभियान शुरू किया था। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान में पालमेदन इलाके से हाशिम मूसा का शव बरामद किया गया। उसके पास से युद्ध संबंधी सामान भी मिलने की जानकारी सामने आई है।
पूर्व DGP एसपी वैद्य ने कहा कि मूसा को जंगलों और पहाड़ी इलाकों में गुरिल्ला शैली के ऑपरेशन का अनुभव था। उनके अनुसार, उसका मारा जाना खास तौर पर पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण झटका हो सकता है। वैद्य ने यह भी बताया कि मूसा को पुंछ-राजौरी क्षेत्र में सुरक्षाबलों पर हुए कुछ हमलों से जोड़कर देखा गया था।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन TRF से जुड़े आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी मूसा के बारे में जानकारी देने पर ₹20 लाख के इनाम की घोषणा की थी।
हालांकि, मूसा की सैन्य पृष्ठभूमि और पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) में पैरा-कमांडो रहने संबंधी दावे सुरक्षा सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों में सामने आए हैं; ये सभी विवरण NIA की आधिकारिक चार्जशीट में दर्ज तथ्य के रूप में उपलब्ध नहीं हैं।