नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध मंगलवार को और तेज हो गया। INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। मार्च से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग तक पहुंचने की पूरी कोशिश करेगा और वहां अपनी बात मजबूती से रखेगा।
मनोज झा ने इस मार्च को महज प्रतीकात्मक कार्यक्रम मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन देश को एक संदेश देने के लिए है। उनके मुताबिक, विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और SIR से जुड़े सवालों को लेकर अपनी चिंताएं सीधे चुनाव आयोग के सामने रखना चाहता है।
मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। एक दिन पहले दिए गए बयान में उन्होंने ज्ञानेश कुमार को कथित रूप से “आर्किटेक्चर ऑफ इलीगैलिटी” का प्रतीक बताया था और कहा था कि उनके पीछे मौजूद राजनीतिक मॉडल और भूमिका को भी जनता के सामने लाया जाना चाहिए। यह मनोज झा का राजनीतिक आरोप है, जिसे चुनाव आयोग या भाजपा की ओर से स्वीकार नहीं किया गया है।
6 अक्टूबर के मार्च से पहले मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने Form 6 में किए गए बदलावों को मंजूरी देने से संबंधित सवाल उठाए हैं। झा ने इसी आधार पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े किए तथा कहा कि ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में निष्पक्ष चुनाव को लेकर विपक्ष की चिंताएं बनी हुई हैं।
विपक्ष के विरोध का एक प्रमुख मुद्दा Special Intensive Revision (SIR) है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। INDIA गठबंधन ने SIR को वापस लेने और कथित रूप से हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग भी उठाई है।
वहीं, चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। Form 6 और SIR से जुड़े विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करने की बात कही है। अदालत की टिप्पणियों के बाद विपक्ष ने अपने आरोपों को लेकर और जोर दिया है।
मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसद संसद परिसर से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर बढ़े। मार्च के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी सांसद मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर कार्रवाई शामिल रही।
हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। कई विपक्षी नेताओं और सांसदों को हिरासत में लिया गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरना भी दिया।
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। विपक्षी नेता चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा ने विपक्ष के आंदोलन की आलोचना करते हुए उस पर संस्थाओं के खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगाया है।
मनोज झा के बयान और INDIA गठबंधन के मार्च के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। अब विपक्ष की नजर चुनाव आयोग के साथ होने वाली बातचीत और SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर आगे की कानूनी एवं राजनीतिक कार्रवाई पर है।