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फॉर्म-6 विवाद पर BJP का पलटवार, संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों को बताया भ्रामक

05 Oct 2026
06:42 PM

ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म-6 में कथित तौर पर अवैध और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाए जाने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने पलटवार किया। 

संबित पात्रा ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की भूमिका को जिस तरह पेश किया, उससे लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है। पात्रा ने विशेष रूप से फॉर्म-6 और SIR के फैसले को लेकर राहुल गांधी के दावों को चुनौती दी।

फॉर्म-6 को लेकर क्या है विवाद?

फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए किया जाता है। SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-6 में ऐसा बदलाव किया गया, जिससे नए और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर इस बदलाव को कथित तौर पर एकतरफा तरीके से करने का आरोप लगाया। 

राहुल गांधी ने 5 अक्टूबर को सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से यह बात स्पष्ट हो गई है कि फॉर्म-6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि बदलाव किसने किया या वह कानूनी था अथवा नहीं।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत ने किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी थी और रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखा जाएगा कि बदलाव किसने किया। कोर्ट ने इस मामले में संबंधित रिकॉर्ड और पक्षों के जवाब लेने की प्रक्रिया शुरू की है। 

संबित पात्रा ने क्या कहा?

संबित पात्रा ने इसी बिंदु को आधार बनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को फॉर्म-6 को “गैरकानूनी घोषित किए जाने” के रूप में पेश करना सही नहीं है। उनके मुताबिक, अदालत ने केवल यह कहा है कि उसने किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी और रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। 

पात्रा ने चुनाव आयोग के 26 सितंबर के प्रेस नोट का भी हवाला दिया। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ जो घोषणा-पत्र लगाया गया था, उसे लेकर उसकी स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी थी। आयोग ने यह भी कहा कि सामान्य SIR अवधि के बाहर संबंधित नियमों के तहत निर्धारित फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे। 

SIR के फैसले पर भी उठे सवाल

इस विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा बिहार में SIR शुरू करने के फैसले को लेकर है। राहुल गांधी और विपक्ष की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि चुनाव आयोग के भीतर महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर मतभेद थे और कुछ फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए।

इसके जवाब में संबित पात्रा ने कहा कि 24 जून 2025 को बिहार में SIR शुरू करने का आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। उन्होंने चुनाव आयोग के फैक्ट-चेक का हवाला देते हुए कहा कि इस आदेश को लेकर यह कहना सही नहीं है कि फैसला केवल CEC ज्ञानेश कुमार ने अकेले लिया था। 

चुनाव आयोग ने भी अपने फैक्ट-चेक में कहा है कि बिहार SIR का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था। 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ी राजनीतिक बहस

हालांकि, 5 अक्टूबर की सुनवाई ने विवाद को फिर से राजनीतिक केंद्र में ला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह रिकॉर्ड देखना चाहता है और यह पता लगाना चाहता है कि कथित संशोधन किस स्तर पर किया गया। अदालत ने तत्काल CEC को निलंबित करने की मांग पर भी कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया और संबंधित पक्षों को नोटिस देकर उनका पक्ष जानने की प्रक्रिया अपनाई। 

इससे फिलहाल यह स्पष्ट है कि फॉर्म-6 और SIR को लेकर न्यायिक जांच जारी है, जबकि राजनीतिक दल अपने-अपने दावों के साथ आमने-सामने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं सुनाया है कि फॉर्म-6 में कथित बदलाव गैरकानूनी था या इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

ECI और BJP का पक्ष बनाम कांग्रेस के आरोप

चुनाव आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 में मूल वैधानिक बदलाव नहीं किया गया और SIR के लिए अतिरिक्त घोषणा-पत्र प्रक्रिया का हिस्सा था। आयोग ने राहुल गांधी के दावे को भ्रामक बताया है। 

वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि SIR और मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे नए मतदाताओं के सामने अतिरिक्त बाधाएं पैदा हो सकती हैं। कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। 

इस पूरे विवाद में अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और चुनाव आयोग द्वारा पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर हैं। फिलहाल अदालत ने किसी पक्ष के आरोप को अंतिम रूप से सही या गलत घोषित नहीं किया है। यही वजह है कि फॉर्म-6, SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।