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नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी के पीछे हटने से सियासी चर्चा तेज

15 Sep 2026
10:29 AM

 

ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय ,कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट से संचिता प्रधान को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, ममता बनर्जी के खुद नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

संचिता प्रधान पेशे से शिक्षिका रही हैं। शिक्षक भर्ती मामले में नौकरी गंवाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी दोबारा नियुक्ति हुई थी। ऐसे में टीएमसी के इस उम्मीदवार चयन को शिक्षक भर्ती, रोजगार और नौकरी से जुड़े मुद्दों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

नंदीग्राम की सीट ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए लंबे समय से बेहद महत्वपूर्ण रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। इसके बाद नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बेहद हाई-प्रोफाइल सीट बन गई।

2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से जीत दर्ज की। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिसके बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

अब टीएमसी ने संचिता प्रधान को मैदान में उतारकर चुनावी मुकाबले को रोजगार और शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों से जोड़ने की कोशिश की है। वहीं, ममता बनर्जी का खुद मैदान में नहीं उतरना भी राजनीतिक विश्लेषण का विषय बन गया है।

क्या नंदीग्राम से ममता बनर्जी का पीछे हटना टीएमसी की रणनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत है? क्या संचिता प्रधान के जरिए पार्टी शिक्षक भर्ती और रोजगार के मुद्दे को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाना चाहती है? या फिर यह महज स्थानीय चुनावी रणनीति है?

नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना एवं नतीजे सामने आएंगे। इसलिए उपचुनाव का परिणाम न केवल नंदीग्राम, बल्कि पश्चिम बंगाल की व्यापक राजनीतिक दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।